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अब भूटान के झरनों से बनेंगी अल्फा और कटी पतंग बीयर, जाने और क्या बनेगा…

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जयपुर । हाल ही में मिल रही रिपोर्टो के आधार पर यह अंदाजा लगाया जा रहा है, कि अब भूटान के झरनों से अल्फा और कटी पंतग जैसी बीयर बनाई जायेगी। और अल्फा और कटी पंतग जैसी बीयर कम्पनियों ने इस प्रोडक्ट की शुरूआत मेड इन भूटान के नाम से कर दी है। भारत की कई बीयर कम्पनियाँ अपने प्रोडक्ट झरनों के पानी से उत्पादन करने की तलाश कर रही है। कम्पनियों के वहाँ के झरनों से मिलने वाले पानी से उनके प्रोडक्टो का पूर्ण व सुलभ तरह से निर्माण होगा।
विदेशी कम्पनियों के मालिकों का कहना है, कि भूटान के पहाडों से जो पानी रिसाव होकर नीचे गीरता है, तो उस पानी के तत्व पत्थरों से रीसकर पानी मीठा हो जाता है। जो बीयर तथा नशीले प्रदार्थ बनाने में उपयोग में लिए जाता है।
मार्केटर्स का कहना है, कि क्राफ्ट बीयर के कॉन्टैक्ट ब्रुइंग और बॉटलिंग इंडियन मार्केट के बजाय लोग भूटान से लाइसैंस लेना ज्यादा पसंद कर रहै है। देश की बडी-बडी कम्पनियों का कहना है कि भारत में बीयर फेक्ट्री लगाने में काफी परेशानी होती है। भारत से लाइसैंस लेना काफी महंगा पडता है। वहीं भूटान से लाइसैंस कुछ ही घण्टो में मिल जाता है। अगर हम इसकी तुलना यूरोप व ब्रिटेन से करे तो वहां कम से कम दो महिने लग जाते है। और भूटान में कारोबार करना आसान होता है। सिंबा ब्रुइंग कपंनी और वाइट राइनों जैसी बडी कम्पनियाँ वहां पर अपना पैर जमाने की कोशिश कर रही है।
भारत की राइनों जैसी बडी कपंनियाँ उन्हें विश्वास है कि वो जून तक पोर्टफोलियो में एक वेरिएंट जोडने के साथ अगस्त तक हरियाणा , उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर पूर्व में अपनी कपंनी का अधिक विस्तार कर लेंगे। क्योंकि इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बढ रही है इसिलिए कपंनियाँ अपने प्रोडक्ट को बेहतर से बेहतर बनाने में लगी हुई है। देश की बडी इंडस्ट्रीयाँ आमतौर पर हेफेजाइन और विटबीयर जैसी गैंहु की किस्म से बीयर बनाते थे, पर अब बीयर की केटेगिरी, जर्मन और बेल्जियम जैसे देशो की तरह बनाने का प्रयास कर रही है। भारत का क्राफ्ट बीयर मार्केट गैहुँ के पानी से बीयर बनाते थे। पर अब यह भारत की कपंनियाँ भी अल्फा और कटी पतंग जैसी केटेगिरी वाली बीयर बनाने की तैयारी में जुटी हुई है।




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