BREAKING NEWS
Search
NBC News24

हमें अपनी खबर भेजे

Click Here!

Your browser is not supported for the Live Clock Timer, please visit the Support Center for support.

अब स्कूल में बच्चों को मारा, तो भुगतना पड़ेगा ये अंजाम

11

जयपुर, बच्चों की सही परवरिश में माँ-बाप का बहुत बड़ा हाथ होता है ये दो  ऐसे लोग है जो अपने बच्चें का बुरा कभी नहीं सोच ते अगर उनका बच्चा कोई गलती करता है तो वो उसे समझते हे लेकिन अगर वो नहीं मानता या कोई बहुत बड़ी गलती  करता है तो उसे डाटते है इतना हे नहीं कभी कभी तो पिटाई भी कर देते है लेकिन इस के पीछे उनका कोई बुरा मकसद नहीं होता. उनका बच्चा दुबारा कोई गलती ना करें इसी लिए वो ऐसा करते है और यह उनका अधिकार भी मना जाता है क्यों की माँ बाप की ही वजह से वो इस दुनियां मैं आते हैं लेकिन कई देशो मैं माँ बाप को डाटने या मरने की इजाजत नहीं है ऐसा ही एक क़ानून दक्षिण कोरिया मैं लागु किया गया है जिस के तहत कितनी भी बड़ी गलती करने पर  माँ बाप अपने बच्चें की पिटाई नहीं कर सकते अगर ऐसा हुआ तो उन्हें जेल की सजा हो सकती हे
हालांकि दक्षिण कोरिया के लोग सरकार के इस फैसले से ना खुश  हैं जिस के चलते वह इस क़ानून का विरोध कर रहे हैं. साथ हे यहां के लोगों का कहना है कि कई बार बच्चों को सुधारने के लिए उनकी पिटाई करना जरूरी हो जाता है.आम लोगों के अलावा इस नए कानून का विरोध पैरेंट एसोसिएशन की प्रमुख ली क्यूंग-जा ने भी किया और कहा ” गलती होने पर मैं अपने बच्चों की पिटाई करूंगी चाहे फिर इसके लिए मुझे सजा ही क्यों ना हो .” यहां के लोगों का भी यही कहना है की बच्चें गलती करेंगे तो उनको डाटना मरना हमारा अधिकार है बच्चें हमारे है साथ हे इनकी जिम्मेदारी भी हमारी है सरकार घरेलु मसलो मैं दखल ना दे
वही दक्षिण कोरिया के सामाजिक कल्याण मंत्री पार्क नेउंग-हू का यह कहना है कि, “ज्यादातर लोग का मानना हैं कि बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है. लोग बच्चों को शारीरिक सजा देना अच्छा नहीं मानते. अब ये क़ानून इस सोच को बदले गा
दरअसल साल 1960 में दक्षिण कोरिया में एक क़ानून बना था जिस के अनुसार माता-पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाने के लिए उनकी पिटाई कर सकते हैं. इसी के साथ ही 2010 तक स्कूल में भी ये कानून लागू रहा था.
अब सरकार का यह कहना है की देश मैं बच्चो से बढ़ती मारपीट को दीखते हुए उन्होंने यह क़ानून बनाया है
क्युकी  साल 2001 से 2017 के बीच बच्चों के खिलाफ अपराध के बहुत से मामले सामने आए हैं.इतना हे नहीं  यहां हुए एक सर्वे के मुताबिक 76 फीसदी लोग बच्चाें को मारना-पीटते है




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »