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कोटा में 940 बच्चों की मौत का आखिर जिम्मेदार कौन?

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जेके लोन अस्पताल में 2019 में 940 बच्चों की मौत को बीजेपी ने गंभीरता से लिया है। एक महीने में 77 बच्चों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब बीजेपी ने मामले की जांच के लिए सोमवार को चार महिला सांसदों की फैक्ट.फाइंडिंग टीम गठित की है। यह टीम गुरुवार को अस्पताल का दौरा करेगी और उसके बाद तीन दिन के अंदर कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आंकड़े जारी किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि कोटा में मौत की दर राजस्थान में सबसे कम है। अस्पताल प्रशासन से पिछले साल हुई मौतों के आंकड़ों के मुताबिक 2014 में 15719 बच्चे भर्ती हुए थे, जिसमें 1198 बच्चों की मौत हुई व 2015 में 17579 बच्चों में 1260 बच्चों की मौत हुई थी। पिछले साल 2018 में 16436 बच्चे भर्ती हुए थे, जिसमें 1005 बच्चों की मौत हुई और इस वर्ष के आकड़ों के मुताबिक 2019 में 16892 बच्चे भर्ती हुए हैं, इनमें से 940 बच्चों की मौत हो चुकी है।

प्रदेशाध्यक्ष सतीश पुनिया ने सरकार पर निशान साधते हुए कहा कि सरकार के किसी भी नुमाइंदे ने अस्पताल पहुंचकर हालातों का जायजा नहीं लिया, जबकि आस पास के क्षेत्र मे बीजेपी के 5 विधायकों ने अस्तपताल के हालात सुधारने के लिए 50 लाख रूपए देने का ऐलान किया था। पूनियां ने कोटा उत्तर के विधायक और यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के कोटा अस्पताल नहीं पहुंचने पर सवाल उठाये। सोमवार को राजस्थान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पुनिया के निर्देश पर दो पूर्व चिकित्सा मंत्रीे जेके लोन अस्पताल पहुंचे और वहां का जायज़ा लिया जिसपे काॅंग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पहुॅंच कर हंगामा किया। इस दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बच्चों की मौत पर सियासत करने का आरोप लगाते हुए राजेन्द्र राठौड़ का घेराव किया व दोनों नेताओं को जेके लोन अस्पताल में जाने से रोकने का भी प्रयास किया।




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