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पाकिस्तान में हो रहा मानवाधिकारो का हनन, जाने सेना ने निर्दोषो को क्यों मारा

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जयपुर । पाकिस्तान में आतंकवाद का खोफ छाया हुआ है। यहाँ आतंकवाद के नाम पर लोगो के मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है। न्यूज चैनलों के आधार पर बताया जा रहा है, कि यह आतंकवाद वार आन टेरर से हो रहा है। वार आन टेरर एक ऐसा सगंठन है, जिसके बारे में बताया जा रहा है, कि पिछले सालों में अमेरिका में 9/11 को शुरू हुए हमलों में कई निर्दोष लोगो की जान गई है। पाक सैनिकों और विद्रोहियों के मध्य आपसी युद्द के कारण सारे सबूत धिरे-धिरे सामने आ रहे है।
स्वतंत्र शोध संगठनों, व स्थानीय अधिकारियों और राजनैतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं के आधार पर आंकडे बताये जा रहे है, कि 2002 से अब तक कम से कम 50 हजार निर्दोषो की जान गई है। और इसके कारण 50 लाख से भी ज्यादा लोग बेघर होकर इधर-उधर भटक रहे है।
आतंकवाद का मामला जब सामने आया, जब नोबल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को एक तालिबान के आतंकवादी ने सिर में गोली मार दी थी। सूत्रो के आधार पर बताया जा रहा है, कि मलाला यूसुफजई तालिबान में लडकियो के पढाई के मामले में तालिबानी आतंकियों ने मलाला के सिर में गोली मार दी थी। ये आतंकवादी । पूर्व राष्ट्रपति रह चुके परवेज मुशरर्फ पर हमला करने की कोशिश में जेल में बंद रह चुके रसिद ने पत्र लिखकर मलाला को गोली मारने का कारण समझाने की कोशिश की है। पर एक साल बाद एक विडियो में मरे हुए लोगो की बात को झूठा ठहरा दिया गया था। और फिर रसीद को मारने के लिए उसके घर पर बम गिराने की कोशिश की पर बम रसीद के घर से दो घर छोडकर एक निर्दोष परिवार पर गिर गया, जिसमें एक 3 साल का बच्ची की मौत हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक इस गलती को आज तक नहीं माना गया है।
इस मामले में जो लोग सामाजिक सबूत जुटाते हुए पाए जाते है। तो सेना उन्हे भी मार देती है। यह उदाहरण पीटीएम के 26 कार्यकर्तायो का है, उनकी मौत उस समय हुई थी, जब वे शांतिपुर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। और उन पर सैना की तरफ से आरोप लगाकर सीधा फायरिंग कर दिया गया था।




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