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यहां मिलता है बिना पेैसों का सामान…. जानिए आखिर कौन सी है ये जगह

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जयपुर, आज के समय मैं पैसे के बीना कुछ नहीं है.. पैसा आज हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता हे इसे पाने के लिए आज बच्चों से लेकर बूढ़े भी संघर्ष के साथ ही कड़ी मेहनत भी कर ते है….हर छोटे से बड़ी वस्तु आज पेसो से ही मिलती है यहां तक की आज इंसान की इज्जत भी इसी के पीछे है. लेकिन एक और जहां पैसा सबकुछ हे सारे सुख सुविधाएं खरीद ने का साधन है वही दूसरी और आपको जानकर हैरानी होंगी की ऐसी भी जगह है जहां पैसा काम मैं  ही नहीं लिया जाता.. यहां सामान भी बीना पेसो के मिलता है … तो है ना ये चौकाने वाली बात.. आपको यकीन हो या ना हो पर ऐसी जगह और कही नहीं बल्कि हमारे देश मैं ही मौजूद है जहां पेसो का प्रयोग नहीं किया जाता दरअसल ये जगह असम के  मोरीगांव जिले में जूनबिल क्षेत्र है  जहां पर एक मेला ऐसा लगता है। जिसमे  में हर सामान मुफ्त में मिलता है। इसी के चकते यह मिला अपने आप मैं एक अनोखा मेला है हर साल ये मेला तीन दिन के लिए लगता है। जिसमे पहाड़ी जनजातियां और मैदानी जनजातियां अपना सामान बेचने के लिए भारी संख्या में अति हैं। साथ ही ये मैला जिस खासियत के लिए मशहूर है वो है यहां पेसो का इस्तेमाल ना होना जी हा इसमें आधुनिक मुद्रा यानि पैसे का चलन नहीं है।
यहां सामान के बदले सामान की अदला बदली होती है यहां आने वाली जनजातियां अपने बेचने के सामानों को मेला में लेकर अति हैं। इस मेले में मुख्य रूप से अदरख, कच्ची हल्दी, कुम्हड़ा के साथ ही मैदानी इलाकों के लोग पीठा, लड्डू, सूखी मछली समेत अन्य सामग्रियों की अदला-बदली करते हैं.. यह मेला पिछले पांच सौ साल से यु ही चला आ रहा है।साथ ही यहां आने वाली जनजातियों को यहां पर आम बोलचाल में मामा-मामी के नाम से संबोधित किया जाता है। । इस मेले में जोनबिल (झील) में सामूहिक मछली पकडऩे की भी परंपरा निभाई जाती है इतना ही नहीं  मेला के आखिरी दिन ऐतिहासिक गोभा राजा का राज दरबार लगाया जाता है। जिसमें सभी लोग हिस्सा लेते हैं।




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