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लेखक की कलम से – शांतिदूतों की विकृत मानसिकता और धधकता वहशीपन का मंजर

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हाल ही में श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 290 लोगों की मौत हो गई। जबकि करीब 5 सौ से अधिक घायल हो गए….लेकिन सौचने वाली बात ये है…. कि आखिर इन धमाकों के पीछे कौन लोग है….. क्यों…ये लोग मौत का खेल खेलते हैं….

क्यों.. इनके दिलो दिमाग में दयाभाव नहीं आता….कैसे किया जाता है इनका ब्रेन वॉस….देखिए एन. बी. सी. न्यूज 24 की ये खास रिपोर्ट…….

कोई खौफ़ नही…… कोई वजह नही…….बस विकृत मानसिकता और झूठी बातों के सहारे…..कुछ  नियंत्रित शांति दूतों के माध्यम से….. कथित शांति और अमन के पैगाम का….. विभत्स नजारा देखने को मिला…  यह मंज़र उस जगह भी देखने को मिला….. जिस जगह होली वाटर छिड़क कर परमात्मा के पुत्र से…. मुलाकात करवाई जाती है…. जहाँ आपके द्वारा किये गए तमाम गुनाहों की….. माफ़ी मांगने के लिए… एक स्पेशल जगह तक बनी होती है….. लेकिन  ये बात आसमानी क़िताब के मालिक को अच्छी नही लगी होगी….. और उन्होंने अपने शांति दूतों को…. हदिस के अनुसार हुक्म की तामील के लिए भेजा…, और उनके अनुसार इन काफ़िरों को दोजख़ की आग में जलाया….. इस काम के लिए उन्हें 72 हूरें मिलेगी….. और दूध की नदियों में स्नान कर के… उनकी अंगूरों के बगीचे में महफ़िल सजेगी….।

हालांकि ये बाते सुनने में तो महज एक मजाक सी लगती है…. लेकिन इन सब के पीछे एक बेहद ही कुंठित.. और घृणित सोच है….. जो सिर्फ और सिर्फ खून खराबा करना सिखाती है…. ये सोच लोगों का ब्रेन वाश कर…. उन्हें कट्टरपंथी बनाती हैं…. दूसरे धर्म….. मज़हब और सम्प्रदायों के ख़िलाफ़…… बंदूक उठाकर गोली चलाने के लिए उकसाती है…. मज़बूर करती है….। और इसी सोच को समय समय पर कट्टरपंथी उलेमाओं…. और मज़हब के संरक्षकों की ओर से सींचा जाता है…… खून खराबे की खाद देकर…. पौधे को पेड़ बनाया जाता है….. और यह समस्त बागवानी जिस मज़हब में की जाती है…..वो मज़हब पूरे विश्व में खुद को शांति का पुरोधा कहलाने के लिए ज़ोर देता है……इतना ही नहीं…. खुद को अमन…. और भाईचारे का मसीहा बताता है…. पर हकीकत तो इसके बिल्कुल उलट है…. जहां इस मज़हब के शांतिदूत सिर्फ और सिर्फ….  लूट – पाट…., गुंडागर्दी….. वहशीपन….. और शांति का परचम लहराते हैं….. जो इसकी बातों को नही मानता….. उन्हें सीधा मौत के घाट उतार दिया जाता है….  यह काम भी वहां किया जाता है…… जहां इनकी संख्या पर्टिकुलर 40 प्रतिशत होने लगती है……. वरना उस से पहले तो ये सिर्फ चुपचाप बैठे रहते हैं…….। अगर बात साफ तौर पर की जाए तो…. अब वक़्त आ गया है कि… इन शांतिदूतों  को अपना आदर्श मानने वालों को…..  उन्हीं की भाषा में जवाब दिया जाए….. क्योकि ज़िद्दी मूवी का एक बहुत ही बढ़िया डॉयलोग है कि…. — “जानवर को मारने के लिए जानवर बनना ही पड़ता है”….  जब जब….. जिस जगह पर इन्होंने….. अपने आसमानी किताब के कानून को….. लागू करने की मुहिम पर ज़ोर दिया है…… वहाँ सिर्फ और सिर्फ हैवानियत का नँगा नाच देखने को मिला है…..इतना ही नहीं…. वहाँ की सभ्यता…. और संस्कृति का विनाश हुआ है….सम्पूर्ण विश्व में जितने भी धर्म या मज़हब है…..  उनमें से सिर्फ…. एक ही “मज़हब विशेष” के शांति दूतों को…. बेगुनाहों का कत्लेआम करना पसंद है….. इनकी इबादत का ये अहम हिस्सा है….लेकिन अब वक़्त आ गया है….

कि सम्पूर्ण विश्व को समझना होगा कि…. आतंकवाद को अगर जड़ से मिटाना है…. तो मज़बूती से…. एक साथ खड़ा होना होगा….. नहीं तो आने वाली पीढ़ी को…. स्वयं के हाथों सिर्फ और सिर्फ बर्बादी की सौगात देकर जाएंगे…..।




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