विधानसभा चुनाव: बीजेपी-कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, गैर आदिवासी वर्ग उतारेंगे अपना उम्मीदवार

242

पिछले दो चुनाव की तरह इस चुनाव में भी समानता मंच की सामान्य व ओबीसी वर्ग के हितों के लिए मांगें एक बड़ा मुद्दा हो सकती है.

अखिलेश शर्मा/डूंगरपुर: प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लगने के साथ राजनैतिक दलों ने अपनी तैयारिया शुरू कर दी है . इसी कड़ी में प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में भी कांग्रेस व बीजेपी ने चुनाव को लेकर अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है. बीजेपी जहां विकास के मुद्दे पर चुनाव में उतर रही है वहीं कांग्रेस भाजपा सरकार की नाकामियों जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही है. लेकिन पिछले दो चुनाव की तरह इस चुनाव में भी समानता मंच की सामान्य व ओबीसी वर्ग के हितो के लिए मांगे एक बड़ा मुद्दा हो सकती है.

प्रदेश का आदिवासी बहुल जिला डूंगरपुर प्रदेश के टीएसपी जिलो में शामिल है. डूंगरपुर जिले में विधानसभा की चार सीटें आती है जिसमे डूंगरपुर, सागवाडा, चौरासी और आसपुर विधानसभा सीट शामिल है. परिसीमन होने के बाद चारो सीट एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हो चुकी है. जनजाति उपयोजना क्षेत्र के जनजाति वर्ग के लिए तो सरकार की ओर से कई प्रावधान किये है लेकिन जनजाति उपयोजना क्षेत्र मे निवास करने वाला सामान्य, ओबीसी व एससी वर्ग के अधिकारों के साथ क्षेत्र में कुठाराघात हो रहा है.

टीएसपी क्षेत्र में गैर आदिवासी वर्ग की अधिकारों की रक्षा के लिए बना समानता मंच पिछले 16 सालो से लड़ाई लड़ रहा है. समानता मंच की मांगो पर गौर नहीं करने का खामियाजा वर्ष 2008 में तत्कालीन भाजपा सरकार को उठाना पड़ा था. इसके बाद जब 2008 में कांग्रेस की सरकार बनी तो गहलोत सरकार ने अपने अंतिम साल में समानता मंच की मांगो को देखते हुए 1 से 9 स्केल तक की नौकरियों में स्थानीय को वरीयता देने की अधिसूचना जारी की.

जबकि साल 2013  में बनी भाजपा सरकार ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के अंतिम 6 माह में किये फैसलों की समीक्षा करते हुए टीएसपी क्षेत्र के सामान्य व ओबीसी वर्ग को अभ्यर्थियों को नौकरियों में वरीयता देने व 200 करोड़ के पैकेज को समाप्त कर दिया था. लेकिन समानता मंच ने सागवाड़ा में 29 मई 2016 को विशाल अधिकारी रैली की जिसमे एक लाख से अधिक लोगो ने भाग लिया. टीएसपी क्षेत्र में समानता मंच के शक्ति प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने समानता मंच के पदाधिकारियों से साथ बैठक की. जिसमे सरकार ने पुनः नौकरियों में स्थानीय को वरीयता देने व कई अन्य मांगो पर भी सहमती जताई. इसमें से कुछ समय बाद ही सरकार ने नौकरियो में स्थानीय को वरीयता देने के घोषणा करते हुए पुनः अधिसूचना जारी की लेकिन शेष मांगो पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया.

समानता मंच की मांगें
– टीएसपी क्षेत्र की प्रत्येक जिले मे एक विधानसभा सीट सामान्य व ओबीसी के लिए होनी चाहिए
– उसी प्रकार पंचायत समितियो में भी प्रधान पद पर भी सामान्य व ओबीसी वर्ग के लिए होनी चाहिए
– सरपंच चुनाव में भी अनुपातिक जनसंख्या का महत्व होना चाहिए
– नौकरियों में मेरिट में आने वाला उम्मीदवार अपने ही वर्ग में लिया जाना चाहिए
– जनजाति उपयोजना क्षेत्र में एसटी वर्ग को मिलने वाली सुविधाएं सभी वर्गों के लिए एक समान होनी चाहिए
– रीट परीक्षा में एस्ट वर्ग की भाति गैर आदिवासी वर्ग को भी 36 फीसदी अंक मिलने चाहिए
– स्थानीय नौकरियों में एसटी वर्ग को की प्रमोशन व्यवस्था की पुनः समीक्षा

दरअसल टीएसपी क्षेत्र में सरपंच से लेकर सांसद तक सभी राजनैतिक पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है. समानता मंच ने समय समय पर सामान्य व ओबीसी वर्ग की बहुलता वाले क्षेत्रो में सरपंच चुनाव के लिए रोस्टर प्रणाली लागू करने की मांग उठाता आया है. पिछली 29 मई 2016 को समानता मंच की विशाल रैली के बाद सरकार ने नौकरियों में स्थानीय को वरीयता देने की मांग को क्रियान्विति किया था. वहीं राजनीती में पंचायत स्तर पर रोस्टर प्रणाली लागू करने सहित अन्य मांगो को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया था लेकिन सरकार की ओर से उन मांगो पर कोई राहत नहीं दी गई.

इधर भाजपा सरकार द्वारा समानता मंच की मांगो को पूरा नहीं किये जाने पर समानता मंच में आक्रोश है. समानता मंच के टीएसपी क्षेत्र के प्रमुख दिग्विजय सिंह का कहना है मांगो को पूरा नहीं किये जाने का खामियाजा भाजपा सरकार को विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ेगा. उन्होंने कहा की दोनों दलों ने समानता मंच को धोखा दिया है जिसके चलते समानता मंच डूंगरपुर जिले सहित अन्य जिलो की सीटो पर अपना उम्मीदवार उतारेंगे.

इधर समानता मंच के चलते दोनों राजनितिक दलों की गणित बिगड़ने के सवाल पर जब भाजपा के नेताओ से पूछा गया तो उन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा को कोई नुकसान नहीं होने का दावा किया. लेकिन कांग्रेस के नेताओं का कहना है की कांग्रेस पार्टी ने सत्ता के दौरान समानता मंच की मांगो को माना था और अगर फिर से कांग्रेस की सरकार बनती है तो कांग्रेस पार्टी टीएसपी क्षेत्र में सभी वर्गो को साथ लेकर चलेगी.

हालांकि समानता मंच द्वारा विधानसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा ने कांग्रेस व भाजपा की मुश्किलें तो बढ़ा दी है. क्योकि डूंगरपुर जिले सहित टीएसपी क्षेत्र के सभी जिलों की सीटें एसटी आरक्षित होने से एसटी वर्ग के वोटो का धुर्विकरण हो जाता है और उस स्थिति में  सामान्य व ओबीसी वर्ग के वोट निर्णायक वोट माने जाते है. अब देखना होगा की समानता मंच की इस हुंकार से विधानसभा चुनाव में किस पार्टी को कितना फायदा और कितना नुकसान होता है.




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »