BREAKING NEWS
Search
NBC News24

हमें अपनी खबर भेजे

Click Here!

Your browser is not supported for the Live Clock Timer, please visit the Support Center for support.

युवाओं का आदर्श बने हनुमान बेनीवाल

31

जयपुर,  हनुमान बेनीवाल का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है, ये हम क्यों कह रहे हैं ये हमारी रिपोर्ट देखने के बाद आपको पता चल जाएगा……. राजनीति में बेनीवाल युवाओं का आदर्श बन चुके हैं,… हनुमान बेनीवाल के एक इशारे पर लाखों लोगों की भीड़ जुट जाती है। आज हम आपको बताएंगे बेनीवाल के फर्श से अर्श तक पहुंचने की पूरी कहानी….

नागौर जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर बरणगांव के रहने वाले हनुमान बेनीवाल के पिता विधायक रहे हैं…… जिसके चलते उनको राजनीतिक माहौल मिला….. जयपुर शहर से ही बेनीवाल ने पढ़ाई की और राजस्थान विश्वविद्यालय में पढ़ते-पढ़ते बेनीवाल ने चुनाव लड़ने का मन बना लिया… 1995 में उन्होंने राजस्थान कॉलेज में प्रेसीडेंट पद पर जीत हासिल की…बस यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हो गया….. और फिर इसके बाद बेनीवाल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा…. 1996 में यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में और 1997 में राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीतकर परचम लहराया….

साल 2003 में पहली बार ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी से नागौर के मूण्डवा विधानसभा से चुनाव लड़कर दूसरे स्थान पर रहने वाले बेनीवाल साल 2008 में बीजेपी से विधायक बने। खींवसर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने के बाद वसुंधरा राजे का विरोध करने के चलते उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद बेनीवाल ने जिस तरह बीजेपी और कांग्रेस का विरोध किया। और फिर धीरे-धीरे लोग उन्हें पसंद करने लगे, खासकर युवाओं में बेनीवाल ज्यादा लोकप्रिय हुए। किसान और युवा की बात करने वाले बेनीवाल हर उस कार्यक्रम, आंदोलन और सम्मेलनों में शामिल हुए, जो सरकार के खिलाफ थे या किसानों, युवाओं से जुड़े हुए थे….

इस दौरान प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे,  इसके बावजूद विधायक बेनीवाल ने अपने विधानसभा क्षेत्र में खूब काम करवाया। किसानों से जुड़े हर मुद्दे पर वो सरकार के सामने खड़े हो गए, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ती गई। साल 2013 के चुनाव में हनुमान बेनीवाल ने एक बार फिर निर्दलीय के रूप में खींवसर से ताल ठोकी और चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे।

बीजेपी से अलग हुए हनुमान बेनीवाल ने विधानसभा चुनाव 2018 से पहले राजस्थान में जहां तीसरे मोर्चे के रूप में अपनी अलग राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का गठन किया…… साथ ही 58 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा और 3 विधानसभा सीटों को जीतकर अपनी मौजूदगी राजस्थान में दर्ज करवाई।

साल 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद जाट बेल्ट में बीजेपी कमजोर साबित हुई। कई जगह विधायक हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने बीजेपी को चुनाव हराने का काम किया। बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। यही वजह है कि जाट बाहुल्य चार लोकसभा सीट पर कमजोर दिख रही बीजेपी को रालोपा से गठबंधन कर एक सीट छोडऩा फायदे का सौदा नजर आया। इसके बाद बीजेपी ने हनुमान बेनीवाल से गठबंधन का हाथ बढ़ाया

वीओ- जानकारी के मुताबिक 2019 के आम चुनाव से पहले बीजेपी ने करीब एक महीने पहले हनुमान बेनीवाल से संपर्क किया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रालोपा का बीजेपी में विलय चाहते थे। पार्टी के बड़े नेताओं ने इसके लिए कोशिश भी की, लेकिन हनुमान बेनीवाल विलय के लिए राजी नहीं हुए। साथ ही बेनीवाल खुद की जगह किसी अन्य को रालोपा का उम्मीदवार बनाना चाहते थे, लेकिन बीजेपी चाहती थी कि वे खुद चुनाव लडें। आखिरकार एक शर्त हनुमान बेनीवाल की मानी गई कि गठबंधन करेंगे और हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी की ये शर्त मानी कि वे खुद चुनाव लडेंगे। बेनीवाल ने पूरे जोर शोर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की…..

23 मई 2019 को लोकसभा चुनाव के परिणाम आए नागौर सीट पर एनडीए प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को भारी वोटों से हराया। राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटों में से 24 सीटों पर बीजेपी ने अपने प्रत्याशी उतारे थे, उन सब ने भी जीत हासिल की। नागौर की सीट पर बीजेपी ने हनुमान बेनीवाल की आरएलपी ने गठबंधन कर लिया था। जिसका फायदा  बीजेपी को मिला।

NBC NEWS 24




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »